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Friday, 23 September 2016

साधना की प्यास

भीतरी खालीपन भरने की अनंत खोज अनंत से शुरू हो अनंत पे समाप्त होने की अज्ञात यात्रा के एक पड़ाव पर साधना के मनमोहक जगत में प्रवेश करती,जहाँ एक नया मायाजगत शुरु हो जाता जहाँ एक साधना से दूसरी साधना की मृगरीचिका खींचती हुई ले जाती उस खालीपन के एक दुसरे आयाम में जहां वह देखती जिसे वो खालीपन समझ के भाग रही थी वो खालीपन ही भराव है ,भराव है शून्य का उसी न होने में ही सर्वस्व पाने का आनंद है।उसी न होने की जागृति में जागना घट जाता ,उसी न होने में सर्वस्व पाना हो जाता ,उसी न होने के ज्ञान में गीता का किसी कृष्ण से प्रादुर्भाव होता।यह साधना की सीढ़ी वही ले जाती जहाँ से शुरुआत हुई।आना वहीँ है क्यों की कहीं जाना नहीं है।

https://www.youtube.com/watch?v=p-o_ocSc1rM